नितिन नवीन का BJP कार्यकर्ताओं को मंत्र, बंगाल की तरह वोटर्स से बनाएं रिश्ते

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भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपने दो दिनों के कार्यक्रम में कार्यकर्ताओं को कई मंत्र दिए, लेकिन मतदाताओं से जनभागीदारी बढ़ाने का सबसे अहम मंत्र दिया।

उन्होंने कार्यकर्ताओं से संवाद में उस परिभाषा को बदलने का प्रयास किया, जिसमें जनता को केवल चुनाव के मौसम में याद किया जाने वाला मतदाता मान लिया जाता है।

उन्होंने कहा, पार्टी के भीतर अब यह समझ मजबूत हो रही है कि विपक्ष से लंबी वैचारिक लड़ाई केवल भाषणों, विज्ञापनों और चुनावी नारों से नहीं जीती जा सकती। उसके लिए ऐसे जनसमर्थन की जरूरत है, जो खुद भाजपा के साथ वैचारिक लड़ाई में सहभागी बने।

पश्चिम बंगाल में किया गया ऐसा ही प्रयोग

उन्होंने अपने उद्बोधन में स्पष्ट संदेश दिया कि पश्चिम बंगाल में ऐसा ही प्रयोग किया गया, यह भाजपा के लिए एक राजनीतिक प्रयोगशाला की तरह उभरकर आया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल में भाजपा ने सिर्फ चुनाव नहीं लड़ा था, उसने अपने समर्थकों के भीतर यह भावना जगाई थी कि वे एक वैचारिक लड़ाई लड़ रहे हैं। यही कारण था कि वहां पार्टी का समर्थक केवल रैली की भीड़ नहीं था।

वह मोहल्ले की बहसों में था, इंटरनेट मीडिया के तर्कों में था और कई जगहों पर भय के बावजूद खुलकर अपनी पहचान के साथ खड़ा था। नितिन नवीन ने उत्तराखंड में भी मतदाताओं से ऐसे ही रिश्ते जोड़ने पर जोर दिया। कहा, सरकार की योजनाओं का प्रचार, राष्ट्रवाद के मुद्दों, सांस्कृतिक अस्मिता इन सभी में संगठन जनता के साथ जनभागीदार बने, इसके लिए संगठन को प्रयास करने होंगे।

उन्होंने साफ कहा, यह बदलाव छोटा नहीं है। यह मतदाता को सहभागी नागरिक बनाने की कोशिश है। अगर भाजपा इस माडल को लागू कर पाती है, तो आने वाले वर्षों में चुनावी राजनीति का चरित्र अधिक वैचारिक, अधिक प्रत्यक्ष दिखाई दे सकता है।

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