भिलाई (क्राइम डेस्क)। दुर्ग जिले के खुर्सीपार थाना अंतर्गत अवैध कबाड़ का एक बहुत बड़ा सिंडिकेट फिर से सक्रिय हो गया है। पुलिस कप्तान के सख्त निर्देशों के बावजूद स्थानीय पुलिस की नाक के नीचे कबाड़ और चोरी के लोहे का काला कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। सूत्रों से मिली पुख्ता जानकारी के मुताबिक, ‘बालाजी ट्रेडर्स’ के नाम पर करण सूरी नामक व्यक्ति द्वारा चोरी-छिपे बड़े पैमाने पर अवैध कबाड़ का भंडारण किया जा रहा है।
कप्तान सख्त, लेकिन सेनापति सुस्त!
याद दिला दें कि महज एक महीना पहले ही दुर्ग एसपी विजय अग्रवाल ने जिले के सभी थाना प्रभारियों को कबाड़ माफियाओं और अवैध कारोबारियों पर कड़ा प्रहार करने के निर्देश दिए थे। लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। जिला कप्तान के आदेशों की सरेआम अवहेलना की जा रही है और खुर्सीपार पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है। आखिर क्या वजह है कि अब तक इस अवैध ठिकाने पर कोई कार्रवाई नहीं की गई?
अलमारी बनाने की आड़ में कबाड़ का साम्राज्य
बताया जा रहा है कि सूरी साहब पहले अलमारी बनाने का काम करते थे, लेकिन अब इसी काम की आड़ में उन्होंने कबाड़ का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा कर लिया है। सूत्रों की मानें तो जामुल क्षेत्र में अवैध कबाड़ी गोदाम संचालित करने वाला राजकरण और उसके साथी इस पूरे खेल के मुख्य मोहरे हैं।
सुबह 4 बजे से शुरू होता है खेल: जानिए पूरा रूट
इस काले कारोबार की कार्यप्रणाली बेहद शातिर तरीके से अंजाम दी जा रही है:
तड़के का खेल: सुबह ठीक 4 बजे से ही भिलाई स्टील प्लांट (BSP) से आने-जाने वाले ट्रकों से लोहे की अवैध खरीदी-बिक्री का खेल शुरू हो जाता है।
ट्रांसफर पॉइंट: यह सारा लेन-देन ‘भांचा कबाड़ी गोदाम’ के पास अंजाम दिया जाता है।
सप्लाई चेन: वहां से चोरी के लोहे को बड़ी चालाकी से डीआई (DI) वाहनों में लोड किया जाता है।
अंतिम ठिकाना: इन गाड़ियों के जरिए माल को सीधे खुर्सीपार स्थित ‘बालाजी ट्रेडर्स’ में खपा दिया जाता है।
भ्रष्टाचार की ‘हफ्ता’ वसूली?
गोपनीय सूत्रों से मिली सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, इस अवैध कारोबार को बेखौफ चलाने के पीछे खाकी का संरक्षण है। चर्चा है कि खुर्सीपार पुलिस तक हर महीने तय ‘हफ्ता’ (महीना) पहुंच रहा है, जिसके कारण कबाड़ माफिया के हौसले बुलंद हैं।
बड़ा सवाल: एक तरफ जहां पुलिस अधीक्षक दुर्ग, दो नंबर के धंधेबाजों और अपराधियों पर नकेल कसने के लिए लगातार जमीनी स्तर पर कार्रवाई कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ थाने में बैठे कुछ पुलिस कर्मचारियों की मिलीभगत और ‘सेटिंग’ के कारण उनके दावों की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। अब देखना यह होगा कि इस खुलासे के बाद क्या खुर्सीपार पुलिस अपनी साख बचाने के लिए ‘बालाजी ट्रेडर्स’ पर कार्रवाई करती है, या फिर यह ‘लोहे का खेल’ यूं ही जारी रहेगा?