भिलाई-3 और चरौदा क्षेत्र में स्थित ज्योति स्कूल में छात्रों की किताब, कॉपी, ड्रेस और जूते की खरीद व्यवस्था को लेकर अभिभावकों के बीच असंतोष देखने को मिल रहा है। स्थानीय स्तर पर संचालित विद्यार्थी बुक डिपो और स्कूल प्रबंधन के बीच संबंधों को लेकर भी कई सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, स्कूल में क्लास 1 से लेकर 12वीं तक के विद्यार्थियों के लिए निर्धारित किताबें और अन्य शैक्षणिक सामग्री एक सीमित विक्रेता के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं। अभिभावकों का आरोप है कि उन्हें खुले बाजार से खरीद की स्वतंत्रता नहीं मिल रही है और निर्धारित स्थान से ही सामग्री लेने के लिए बाध्य किया जा रहा है।
कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि पूर्व में स्कूल के एक सहायक प्राचार्य द्वारा विभिन्न बुक डिपो को किताबों की आपूर्ति सुनिश्चित की जाती थी, जिससे प्रतिस्पर्धा बनी रहती थी। हालांकि, उनके निधन के बाद वर्तमान व्यवस्था में बदलाव आने की बात कही जा रही है।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि संबंधित बुक डिपो द्वारा पब्लिशर से सीधे तालमेल कर सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे कीमतों में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। अभिभावकों का कहना है कि पहली कक्षा के एक छात्र की किताबों का खर्च लगभग ₹4000 तक पहुंच रहा है, जो उनके लिए आर्थिक रूप से बोझ बनता जा रहा है।
हालांकि, इन सभी आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। स्कूल प्रबंधन या संबंधित बुक डिपो की ओर से इस विषय पर कोई औपचारिक बयान सामने नहीं आया है।