कबाड़ियों से स्क्रैप खरीद कर बेचने वाला ट्रांसपोर्टर की गाड़ी से चल रहा था किराया नामा, संजय सिंह की गिरफ्तारी से खुलेगा राज?

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भिलाई 3 (जनमत)। भिलाई 3 स्थित मंत्री पेट्रोल पंप के पीछे चल रहे स्क्रैप चोरी के महाघोटाले में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। ‘ए के ट्रेडर्स’ के जीएसटी पंजीकृत गोदाम में सालों से बीएसपी (भिलाई स्टील प्लांट) के ब्लू डस्ट की आड़ में जो अवैध खेल चल रहा था, उसका पर्दाफाश तो पीएमओ (PMO) की चिट्ठी के बाद हो गया। लेकिन अब इस मामले में एक ऐसे रसूखदार ट्रांसपोर्टर और कबाड़ कारोबारी का नाम सामने आ रहा है, जिसने पुलिसिया कार्रवाई के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है।

सूत्रों के हवाले से बेहद सनसनीखेज खबर आ रही है कि इस काले कारोबार को चमकाने के लिए जामुल क्षेत्र के एक नामी जीएसटी कबाड़ी सह ट्रांसपोर्टर की गाड़ियों का इस्तेमाल किया जा रहा था। ट्विस्ट देखिए—जिस गाड़ी से बीएसपी प्लांट के चोरी का लोहा ढोकर मुनाफा कमाया जा रहा था, उसे पुलिस ने मौके से जब्त किया है। अब खुद को पाक-साफ दिखाने के लिए आनन-फानन में एक फर्जी ‘किराया नामा’ (रेंट एग्रीमेंट) तैयार करने की खबर है, ताकि कानून की आंख में धूल झोंकी जा सके।

 पुराना कबाड़ी, नया ट्रांसपोर्टर: रायपुर से भिलाई तक फैला था जाल

सूत्रों की मानें तो इस ट्रांसपोर्टर का एक गहरा और ‘काला’ अतीत रहा है। यह महाशय कभी छोटे-मोटे कबाड़ियों के गोदामों से लोहा खरीदकर बड़े व्यापारियों को खपाने का काम करते थे। रसूख ऐसा बदला कि रायपुर में एक समय पर लोहे का बहुत बड़ा यार्ड और गोदाम भी संचालित किया। पूर्व एसपी अभिषेक पल्लव के कार्यकाल में एक मामले में इनका ‘जनाजा’ निकला था। लेकिन आदतें कहां बदलती हैं! अब भिलाई 3 के इस मेगा स्क्रैप चोरी कांड में भी इनके तार सीधे जुड़ते दिख रहे हैं?

 संजय सिंह की गिरफ्तारी से खुलेगा ‘सिंडिकेट’ का राज!

फिलहाल इस पूरे रैकेट का मुख्य किरदार संजय सिंह फरार चल रहा है। पुलिस उसकी सरगर्मी से तलाश कर रही है। पुलिस के आला अधिकारियों का मानना है कि संजय सिंह की गिरफ्तारी होते ही कई सफेदपोशों के चेहरे से नकाब उतर जाएगा।

जांच के रडार पर CCTV और CDR: पुलिस इस वक्त घटनास्थल के आसपास के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और संदिग्धों के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) को खंगाल रही है। इस जांच में भिलाई से लेकर रायपुर तक के कई बड़े रसूखदारों के नाम सामने आ रहे हैं, जिन्होंने इस चोरी के लोहे से अपनी तिजोरियां भरीं।

सीआईएसएफ (CISF) और बीएसपी प्रबंधन पर उठे गंभीर सवाल

बिना “संरक्षण” के इतना बड़ा “भक्षण” मुमकिन नहीं था। बीएसपी के ही कई जिम्मेदार अधिकारी अब सीआईएसएफ (CISF) की मुस्तैदी और अपने ही विभाग के सुरक्षा तंत्र पर सवाल उठा रहे हैं। टन के हिसाब से बीएसपी प्लांट का लोहा, बीम और स्क्रैप बाहर निकल जाता था और सुरक्षा एजेंसियों को भनक तक नहीं लगी? 25 मई की पुलिस रेड ने साफ कर दिया है कि नीचे से लेकर ऊपर तक सांठगांठ की जड़ें बहुत गहरी हैं।

अब देखना यह होगा कि दुर्ग पुलिस इस रसूखदार ‘किराया नामा’ वाले ट्रांसपोर्टर पर कब शिकंजा कसती है और संजय सिंह की गिरफ्तारी के बाद कौन-कौन से बड़े मगरमच्छ इस जाल में फंसते हैं।

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